आज १२-१३ अगस्त २०१२ को , परम पूज्य दादा जी इतिहास केसरी मास्टर नत्थासिंह जी "निर्दोष" की  ४०वी पुण्यतिथि पर , अपने बड़े बुजुर्गों के शुभाशीष और आशीर्वाद से , बड़े हर्ष के साथ यह वेबसाइट आप  को समर्पित करते हैं . इसके मात्ध्यम से और आप सब के अटूट सहयोग से   आजीवन आप सब की सेवा और शुभ कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा, ऐसी हमारी आशा है.  जय भोले बाबा की !!

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जीवन पूंजी

यह पुस्तक

‘‘न इसको समझिये पुस्तक यह मेरी छाया है।
जो मैंने समझा वही आपको समझाया है।।
है इस में शब्द तो मोती किताब माला है।
यह हंस जनता को इक हार भेंट लाया है।।
या फिर यह आदमी की जिन्दगी का शीशा है।
जो मैंने देखा वही आपको दिखाया है।।
या इसको कैमरा समझो मनुष्य जीवन का।
नहीं छुपाया इसी वास्ते छपाया है।।
इसमें हर गीत व इतिहास के बहान से।
दरअसल मैंने अपने आपको समझाया है।।
कमाये चान्दी के सिक्के तो बहुत जीवन में।
मगर किताब की यह सच्चा धन कमाया है।।
या समझो रंग बिरंगे यह फूल चुन चुन कर।
अबोध माली ने गुलदस्ता सा सजाया है।।
कवि नहीं मैं। तो, कवियों की चरण रज समझो।।
यू हीं शहीदों में इक नाम सा लिखाया है।।
हैं इस में खूबियां जितनी वह आपकी समझो।
हैं जितने दोष वह निर्दोष का सरमाया है।।


लुधियाना -नत्थासिंह निर्दोष




जीवन पूंजी पुस्तक मेरे जीवन की सचमुच ही सच्ची पूंजी है, परन्तु मेरे देश की भी यह सही पूंजी है क्यों कि महापुरूषों के जीवन चरित्र ही देश और कौम का सही सरमाया होते हैं। इससे मैंने अपनी तुच्छ बुद्धि के अनुसार सब नये इतिहास और बहुत से पुराने गीत इकट्ठे करके देने की कोशिश की है। अपनी अस्वस्थता के कारण अपनी जिंदगी का सारा मैटर नहीं दे सका। पुष्प् माला व रत्नमाला का मैटर भी अलग उनमें ही रहेगा।


जिंदगी व तंदरूस्ती रही तो अगले एडिशन में और बाकी मैटर देने का प्रयत्न करूंगा। आप सदा की भांति इस पुस्तक की भी त्रुटियों को क्षमा करके इसे अपनायेंगे ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।


बहुत देर से इस पुस्तक की मुझ से ज्यादा आप सब को प्रतीक्षा थी जो भगवान् ने मेरी इस अवस्था में भी पूर्ण कर दी। अन्त में उस सर्वशक्तिमान् कृष्ण का कोटि कोटि धन्यवाद है। सन्तों महापुरूषों, महोपदेशकों तथा भजनोपदेशकों का बेअंत धन्यवाद करता हूं, जिनके आशीर्वाद, शुभकामनायें तथा हर प्रकार का सहयोग सदा मेरे अंग संग रहता है।